आज की ताजा खबर शिवाः नेहरू कालोनी के निवासियो ने स्टेनपोस्ट चोर को पकड़ा और धनु डाला । यह खबर है तो मामूली,पर है यह हत्या ही । पर इसे वाटर कम्पनीयों की मिली भगत भी नही कहा जा सकता। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि प्राचीन समय में दूर देश की यात्रा में मुसाफिर लोटा और रस्सी लेकर चलते थे जहाॅ भी कुआं बावडी होता था यात्री रूक कर पानी पीते और तरोताजा होते थे । हर राजा के राजधर्म मंे ये अनिवार्य ऐजेण्डा होता था इससे वो ये जहाॅन और परमार्थ भी सुधारता था कहा जाता है कि जिस राजा के राज्य में मुसाफिर को पीने को पानी नही होता वो राजा यशस्वी नही होता है। राजमार्ग के दोनो ओर छायादार वृक्ष और कुऐं पथिक को आराम देते थे व्यापर और धार्मिक कार्य पानी के बलबूते ही होते थे। रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून आज आप जलकल संस्थान के जूनियर इ...
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आदित्य धरती की गोद से निकलता हुआ एक यान आदित्य अपने स्वंयनाम को धन्य करता हुआ सूरज की ओर बढता जाता है यह यात्रा मानो अपने को जानने की है क्योकि सूरज को भारतीय साहित्य में पिता का दर्जां दिया गया है कितना जान पाते है हम अपने पिता को अगर एक रोज सूरज धरती पर न उगे तो शायद हम अपने होने के अहसास को महसूस भी न कर सके उसकी आभा का प्रभामंडल का ही चमत्कार है कि हम बस सरलता से जीवन जीते चले जाते है कभी -कभार उसपर ग्रहण लग जाता है तब हमे अहसास होता है कि हम खगोलीय धटनाओं के एक बिन्दु मात्र है धरती पर 8 मिनट मे सूरज से चली किरण आती है और अरबो साल से ऐसा ही होता आया है शाम को जब सूरज की दीप्तता समाप्त हो जाती है तोे लगता है कि कुछ छूट गया है और खूबसूरती इसमें ही है कि सूरज की अनुपस्तिथि में ही हमे आराम करना होता है और हमारी जैव धडी उसी प्रकार काम करती है भले ही हमने बिजली का अविष्कार कर लिया हो पर विकासक्रम मंे अर्जिंत आदते उसी प्रकार विकसित हुइ है। सूरज को करीब से जानने की जिज्ञासा हमेशा से रही है सबसे पहले सोहो यान अमेरिका ने 02 दिस1995 को भेजा इसके बाद पारकर सोलर प्रोब 12 ...
vrishka ropan
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आज धरती अपने श्रृंगार के लिये पुकार रही थी उसी से प्रेरणा लेकर पत्रं लिखा और वन विभाग से फलदार वृक्ष लाया। काम देखने मे आसान था पर भारतवर्ष में सरकारी मशीनरी से काम करवाना दीवार में सिर फोडने के समान है सरकारी बाबू बाधा रेस के पीएचडी धारक है मै उनको डाक्टर कहता हॅू वे ही बााधा खडी करते है और वही समाधान भी बताते है मतलब कि आदमी अभिभूत हो जाये कि उसने क्या सोचा था पर हकीकत तो और ही है और वो बस सरकारी बाबू ही जानता वो आपको लाजबाब कर देगा और आप सोचेगे कि आपने तो व्यर्थ ही धरती पर जन्म लिया खैर जैसे-तैसे पेड प्राप्त किये और लोगो को वृ़क्षारोपरण के लिये तैयार किया। काफी पहले एक कार्यक्रम चला था फ्रूट फार फयूचर और उसमें भी हमने वहुतेरे फलदार पौधे लगाये थे आज उसके फल बच्चे खा रहे है और आज जो फल हम खा रहे हे वो हमारे पूर्वजो ने लगाये थे । चन्द्रगुप्त ने सारे भारत में सड़क के किनारे पेड़ लगवाये थे किसी भी देश मे ंसफल आर्थिकी के लिंये एक तिहाई भूभाग में पेड़ होने चाहिये सेटेलाइट इमेज से पता चलता है कि वनो का रकबा बडा है। भारतीय वाग्मय में कहा गया है कि एक वृक्ष सोै पुत्र समान ,पर्यावरण से इतनी ...
Gift for mankind The a
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आज सहस्त्रधारा गया एक आश्रम में स्वमी जी से मुलाकात हुई उन्होने कई जटिल रोगो के लिये रामबाण औषधियों की खोज की है वे अत्यन्त सरल है बाल वहमचारी है । मानवता की सेवा में अनवरत लगे हुये है उन्होने कहा कि महाकाल की पे्ररणा से वे रोगियो की सेवा कर रहे हेै सहसा मुझे दीक्षित जी की बात याद आ गयी उन्होेने बताया कि मुम्बई में एक अस्पताल में कुछ लोग आपको धूमते मिल जायेगे अगर कोई गरीब रोगी इलाज में अक्षम है तो वे उससे अस्पलात का बिल पूछते है और अस्पताल को चेक द्वारा भुगतान कर देते है सलाम है ऐसे मानवता के साइलेन्ट योद्वाओं को दीक्षित जी के मुॅह से उनके लिये यही शब्द निकले कि शिवाजी ऐसे लोगे के प्रबल प्रताप से ही यह धरती टिकी हुई है। हाॅ स्वामी जी के अनुभवो से दो चार हो ही रहा था आर्युवेद की महिमा का प्रकरण चल रहा था कि सहसा एक कहानी याद आ गयी कि मुगल शासक के हरम में एक बेगम को राजवैद्यजी की प्रतिभा पर शक हुआ तो उन्होने उनकी परीक्षा लेने की सूझी ।राजवैद्यजी वेगमो के परदा में रहने के चलते चलते नाडी देखने के लिये पतली सुतली रोगी के हाथ में बाॅध देते थे और दवा द...
Old Tehri- The lost city
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आज मेरे मित्र टिहरी से आये उन्होने टिहरी झील के बारे में बताया और बडे उत्साह से वे टिहरी के बारे में बातें करते रहे। अचानक वे पुरनी स्मृतियों मंे खो से गये और अपने धर और खेतो के बारे मंे बात करते-करते उनकी आखें भर आयी मैने कहा सरकार ने उसके बदले में ऋषिकेश में जगह तो दे दी है वे गुस्से के भाव से वोले क्या शरीर का कोई अंग अलग किया जा सकता है और क्या उसकी भरापाई हो सकती है अगर होगी भी तो पहले जैसी नही होगी।मै निरूत्तर हो गया वे वोले यार टिहरी की नींव ही गलत समय पर रक्खी गयी। मै आश्चर्यचकित था मैने कहा कैसे तो वे वोले जनश्रुति है कि जब टिहरी का निर्माण हो रहा था तो उसी समय ज्योतिष भविष्यवक्ताओ ने धोषण कर दी थी कि ये शहर 200 साल तक ही आबाद रहेगा उसके बाद जलमग्न हो जायेगा। मै भी ज्योतिषशास्त्र में रूचि रखता हूॅ तो मैने पूछा कि शहर की स्थापना कब हुई थी तो वे तपाक से बोले 28 दिस 01815 मैने कहा अच्छी बात है जरा समय भी बता दो वे बोले समय तो नही पता मैन अपने एक मित्र सेमल्टी जी को फोन मिलाया उन्होने कहा प्रातः 10 ःबजे सुबह अब मेरे पास सारी जानकारी थी मैने कम्प्यूटर से कुण्डली...
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आज का दिन कल के पुराने ब्लाग से जुडा हुआ था जिन्होने मेरी पिछली कहानी पढी है उन्हे पता होगा कि मैने लिखा था कि बडासी गान्ट्र गाॅव के पास कार जली थी आज कार से आते समय उसी स्पाॅट पर इनोवा और बाइक बाले की भिंडत हो गयी इसे क्या कहेगे प्रकृति में ऐसे संकेत आपको प्राप्त होते रहते है अगर आपकी सूक्ष्म विशलेषण करने की क्षमता है तो आपको पूर्वाभास हो सकता है कई वार तो घटनाये फिल्म की भांति चली है। मैने इकोलाॅजी को समझा है पर घटनाओ के पैर्टन को समझ कर भविष्य को देख पाना कठिन काम है क्योकि यह चेतन और भौतिक जगत के बीच की वारीक समझ है हमारा विवेक एक चीज है और वह तात्कालिक घटनाओ पर प्रतिक्रिया देता है पर दिल की बात समझ कर जो लोग फलाइट को छोड देते है और फलाइट क्रैश हो जाती है। कुछ लोग सिर्फ लिफ्ट लेते है और मौत के मुॅह में चले जाते है। खैर यह टाॅपिक फिर कभी आज उसी स्पाॅट पर एक्सीडेन्ट की बात करते है इनोबा का ड्राइवर गलती पर था उसने गाडी ज्यादा ही काट दी थी और दौनो बाइक सबार गिर पडे हाॅलाकि उन्हे ज्यादा चोट नही लगी और वे उढ गये इनोबा बाला उनसे उल्टा उलझ पडा और लडने लगा और गलती निकालने लगा उसने पुलि...
THE YAMRAJ's Representative
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हमारे समाज में कई कहानियां प्रचलित है कथा और प्रथा कुछ आपबीती और कुछ जगबीती पर आधारित होती है। पर सुनी सुनाई पर तब विश्वास करना पडता है जब वैसी ही धटनाये आपके साथ हो रही होती है। बात बीस साल पहले की है सात मोड के पास जाते हुये एक अजीब से शक्स को देखते ही ऐसा लगा जैसे कि वो किसी जज का अर्दली हो वो किसी स्पाॅट को अजीब तरीके से देख रहा था बात आयी गयी हो गयी पर अगले दिन भी जाते समय वो आदमी उसी स्पाॅट को देखते हुये दिखाई दिया। आते समय सात मोड पर वाइक सबार का एक्सीडेन्ट हो रखा था उसे सरकारी अस्पताल पहुचाया पर वो बच नही सका उसके कई दिन बाद फिर वो अजनबी उसी स्पाॅट पर दिखाई दिया आते समय ट्रक पलटा पडा था उसका ड्राइवर मर गया था। इसी से संबंधित एक घटना दूरसंचार भवन के पास घटी एक संस्था की एम्बुलेन्स की है वो चलते-चलते जल उठी थी उससे पूर्व वहाॅ समान धटना दूसरी एम्बुलेन्स पे घट चुकी थी उसमे भी कई लोग जिन्दा जले थे। ऐसी ही घटना वडासी गा्रन्ट के पास हुई कार टकरा कर जली और कई दिन बाद उसी स्पाॅट पर दूसरी कार जली गाॅव के लोगो ने वहाॅ एक मंदिर बना दिया। पर मैं यह नही समझ पाया...
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आज मेरे मित्र ने मुझे फोन किया कुछ देर बाद उनका सामना मेरे से हो गया वे बोले यार मैने तुम्हे फोन किया था फोन क्यो नही उठाया मैने जेब टटोली मेरा फोन नदारद था मैने कहा यार फोन टेबल पर रखा है वे नाराजगी व्यक्त करने लगे मैने विन्रमतापूर्वक कहा मित्र मेरी सलाह मानो एक माह तक फोन का उपवास रख लो फिर चाहे करबाचैथ का ब्रत कर लेना वे समझ नही पाये और बोले क्या शिवाजी मैने कहा हाॅ मै सच कह रहा हॅू जब भी मुझे साधना करनी होती है तो मै एक माह का फोनकटवा ब्रत रख लेता हॅू वे बडे आश्चर्य से देखने लगे मैने उन्हे अपने कालेज टाइम की मिमकी की याद दिलाई मैने कहा दोस्त काॅलेज में माइम का कम्पटीशन था सब लोग परेशान थे कि क्या किया जाये मैने कहा कि मै पट कथा लिखता हॅू तुम बस मूक अभिनय करना । कहानी की शुरूआत डाक्टर साहब के सुबह-सुबह उठने से होती है फोन की घंटी बजती है गाना चलता है उठो लाल अब आंखे खोलो फोनबा लायी हॅू मुॅह से कुछ तो बोलो डाक्टर साहब अलसाये से फोन उठाते है एक मरीज उनसे मिलना चाहता है उसकी हालत खराब है डाक्टर साहब जल्दी से कुल्ला करते है तब तक एक और फोन की धंटी बजती है ब्रशकरते करते ...
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सेठ रामदास ने मारबल नाम का कुत्ता लेब्रा पाला नजर बचा कर मारबल धर से बाहर चला गया। सेठ का पूरा परिवार परेशान हो गया। घर के सारे सदस्यो और नौकर चाकरो का उसे ढूढने में लगा दिया। हर दिशा में हरेक नौकर भेेज दिये गये पर मारबल न मिला। सेठ जी प्रिंटर के पास उसका फोटो लेकर गये और इश्तहार में लिखवाया मारबल नाम का कुत्ता गायब है ढूढ कर लाने बाले को 5000हजार नकद ईनाम दिया जायेगा आखिर सेठ ने 55000हजार में खरीदा था इसलिये पाॅच हजार कोई बडी रकम नही थी । सेठ जी ने दरोगा जी को भी फोन कर दिया दरोगा जी मारबल नाम का लेब्रा गायब है सारी सी0सी0टी0वी की फुटेज छान मारो कुत्ते के मिलते ही आपकी चाय-पानी कर दी जायेगी।दरोगा जी के मुहॅ में पानी आ गया पूरा पुलिस महकमा कुत्ते की खोज में लग गया पर मारबल को तो जैसे जमीन खा गयी या आसमान निगल गया कुत्ते की खोज में पुलिस के कुत्ते लग गये। रमन ने सड़क पर लगे कुत्ते के रंगीन पोस्टर देखे कुछ देर वो उसे देखता रहा और अचानक उसकी आॅखो में चमक जाग उठी वो त्रिवेणी घाट पर पहुचा उसकी आॅखे एक लडके को तलाश रही थी वो 6साल का अनाथ लडका था जो गुब्बारे बेच कर अपना पेट प...
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26/8/2020 आज सुबह का अखबार पढ रहा था आगरा में एक बच्ची की भूख से मौत हो गयी इस खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया। प्रशासन कह रहा है कि भूख से मौत तभी प्रमाणित होगी जबकि पोस्टमार्टम हो तथा रिर्पोट भूख से मरने की हो। यहाॅ यह भी कहना समीचीन होगा कि विभिन्न धर्मो में कहा गया है कि अगर तुम्हार पडोसी भूखा है तो आप चैन से कैसे भोजन कर सकते हो गढवाल में यह मिसल भी दी जाती है कि एक तिल को भी सात भाईयो ने मिल वांट कर खाया। आपको कोई भी सरदार भूखो नही मरते दिखा होगा यह कोैम बडी जीवट होती है और सामुदायिकता का बडा सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत करती है गुरूद्वारे में कोई भूखा नही रह सकता और कभी आपदा आदि आयी हो तो ये बढ चढ कर मानवता की भलाई के कामो में लग जाते है ऐसा नही है कि और कौमो में ऐसा नही है । अगर भूख से कोई मर रहा हो तो यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वो भूखा न मरे जबकि देश में 2 साल का वफर स्टाॅक सुरक्षित है। मै यह तो नही जानता कि किसने मिड-डे मील योजना विद्यालयो में चलाई पर ऐसे उदहरण है कि बच्चे जिन्हे भोजन मिल रहा होता है वे कुछ भाग बचा कर घर ले जाते तथा उससे उनके माता-पिता का पेट भरता है। यह भी ...
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20/08/2020 आज कार से जा रहा था तो एक ट्रक सडक के किनारे गडडे में गिरा पडा था मानो कह रहा हो कि अगर ये गडडा नही होता तो मै दौड रहा होता।इसके बाद टोल प्लाजा आ गया जिसका निर्माण हो रहा था मैने सोचा कि अगर टोल बसूलेगे तो जिस गडडे में गाडी का टायर आया होगा उतने पैसे माइनस हो जायेगे बेचारे टोल टैक्स वाले क्या खायेगे मुझे उपभोक्ता के अधिकार याद आ गये इन सडको के लिये हम इनकम टैक्स देते है जी0एस0टी कटाते है मुझे सहसा गडडो पर कहानी याद आ गयी जिसमें गडडो पर राजनीति होती है गडडे को देखने का हरेक का अपना नजरिया है टैक्सी ड्राइवर उसे अपने लाभ पर पडा डाका दिखता है जो उसके टायरो को गंजा और एलाइनमेन्ट को खराब कर देता हैं एक इंजीनियर कहता है कि इस गडडे को और चैडा होने दो मरम्मत में अधिक एरिया आयेगा और अधिक बिल बनेगा और अगले साल के लिये अधिक बजट का जुगाड एक जनप्रतिनिधि अगर वो सत्ता पक्ष में है तो कहेगा अगले साल के बजट में जरूर इसे ठीक करा दूगा। विपक्ष बाला इसे आज ही भुना लेना चाहता है वो कहता है इस गडडे के घेरे में जे0ई0 का नाम लिख देना चाहिये जानवर उसे पानी के स्त्रोत के रूप में पहचानते है और ...
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16/08/2020 होटल में मरियल सा दिखने वाला आदमी मुझसे खाने के पैसे मांगने लगा मैने होटल वाले को कह दिया यार इसे एक प्लेट लगा देना उसके खाना खा लेने के बाद मेरे बालक ने मुझे कहा कि लगता है कि अभी इसका पेट नही भरा शायद कई दिनो से भूखा है मेने होटल वाले को एक और प्लेट उसे देने को कहा और उसका पैसा चुका कर घाट की ओर चल दिया वहाॅ कोई सज्ज्न भंडारा करा रहे थे और भिखारियो का झुंड उन्हे घेरे खडा था कई भिखारी अपनी खुराक से भी ज्यादा ले चुके थे और और ज्यादा लेने के लिये लड रहे थे मेरे बच्चे ने पूछा कि खाना वडे वर्तन में प्रयाप्त है िफर भी ये लड रहे है तो मैने कहा कि ये असुरक्षा का मामला है आज का तो पेट भर जायेगा पर कल का क्या पता कोई सेठ आता है या नही और तडगे भिखारी कमजोर भिखारी को धक्के मार कर भीड से अलग कर दे रहे थो मानो सारे खाने पर उनका ही अधिकार हो मैने बालक से कहा कि वेटा हमारी संस्कृति तो कम खाओ और गम खाओ के दर्शन पर आधारित है अगर कम खाओगे तो रोग भी कम ही होगे वरना मोटापा और न जाने क्या-क्या होता रहेगा मैने उसे एक कहानी सुनाई कि एक व्यापारी को तुरत...
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14/08/2020 आज पडोसी के बच्चे 4 तोते के बच्चे लेकर आये और कहने लगे कि अंकल एक तोते का बच्चा आप भी पाल लो मै पक्षियों की आजादी का पक्षधर हूॅ मैने मना कर दिया पर मेरी पत्नी और बच्चे कहने लगे कि पाल लेते है वैसे भी पडोसी के धर पलेगे तो राम-राम तो कहेगे नही आप खुद ही समझ गये होेगें कि पडोसी कैसे है पर मेरा अटल विश्वास है कि किसी को भी बंधन में नही रखना चाहिये वे आकाश में परवाज के लिये बने है उन्हे उडने दो उनके पंखो को विस्तार दो पर मै अपने बच्चे के वाक्य से अंचंभित हुआ जिसने कहा था कि पडोसी के धर पलेगे तो राम-राम तो नही कहेगे क्योकि उनके घर में सुप्रभात ही उठो लाल अब आखे खोलो दारू लाई हूॅ मुह धो लो से होती है और सारे दिन मरा-मरा जपते है। मुझे छोटू की बात सुनते ही कहानी याद आ गयी एक राजा शिकार खेलने जंगल गया तभी उन्होने तोते की आवाज सुनी राजा का काफिला आ रहा है इन्हे लूट लो मजा आयेगा राजा के सैनिक संख्या में कम थे अतः वे भागने लगे भागते-भागते दूर निकल आये थोडा सुस्ताने लगे तभी एक तोेते की आवाज आयी राजन आओ साधु की कुटिया मे आपका स्वागत है वैठो और जलपान ग्रहण करो राजा को बडा आश्चर...
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04/08/2020 आज एक शिकायत पढ़ रहा था जिसमें उसने पूछा था कि कब उसकी पत्नी की चेन मिलेगी मैने उससे दूरभाष से बात की उससे कहा जब पुलिस बाले उस उठाईगीर को पकडेगे और उसके पास से चेन बरामद होगी तो दे दी जायेगी मैने पूछा ये कैसे हुआ वो वोला जो हुआ वो अच्छा ही हुआ मै आश्चर्य मंे पड गया वो बोला, साहब मै और मेरी पत्नी पुल से उस पास जा रहे थे वो अचानक आया और पत्नी के गले से चेन छीनकर नदी में कूद गया मै कुछ दूर तक भागा पर उसे पकड नही पाया पर एक बात अच्छी हुई साहब मुझे तैरना नही आता था मैने निश्चित किया कि अब बहुत हुआ मै बिना तैरने बाले से तैरना जानने बाला बनूगाऔर तैराकी की क्लास ज्वाइन कर ली एक हप्ते में इतना सीख गया कि अपने को डूबने से बचा सकू तथा पानी में किसी का पीछा कर सकू। मैने कहा अपनी इस कहानी को पुलिस थाने में जरूर बतान शायद किसी को इस पे्ररक कहानी से कुछ सीखने को मिले और उस चोर उच्चके के पकडे जाने पर आपको बुला सके।
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03/08/2020 मै चाय की दुकान पर खडा था मेरे पास आकर उसने पीछे से कंधे पर हाथ रखा और कहने लगा यार खाना खिला दो उसके कपडे वेतबरीब ढंग से बस टंगे हुये थे और गिर जाना ही चाहते थे। बाल बढ कर रस्सी हो गये थे मैने चाय बाले से उसके लिये फुल प्लेट चावल लगाने को कहा मैने पूछा तो चाय बाला कहने लगा कि साहब इसका पूरा परिवार खत्म हो चुका है और उसके गम मे यह पागल हो गया । रात को ये मेरी दुकान के आगे ही सो जाता है इससे मेरी दुकान की रखवाली हो जाती है मुझे उस पर दया आने लगी और सोचने लगा कि मैने कितने लोगो को देखा है जो मानसिक रूप से कमजोर या विक्षिप्त थे सबसे पहले आई0डीपी0एल मे एक पागल को बचपन में देखा था उस समय माॅ कहती थी कि ये आदमी जो पागल की तरह दिखता है पागल नही है पर सब उसे पागल ही कहते थे एक दिन पता चला कि उसे पुलिस ने पकड लिया है उसके पास से ट्रान्समीटर बरामद हुआ है जो उसने पुलिया के नीचे छुपा रखा था उस समय मुझे पता चला कि आर्मी इैलेक्ट्रिाॅनिक सर्विलांस भी करती है और उसी के तहत वो पगाल पकडा गया वो जासूस था। ऐसे में कई फिल्मे दिमाग में आने लगी जहाॅ असाधारण अभिनय करने बाले अभिनेतओ ने अपनी अभिनयन क...
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28/07/2020 आज आॅफिस में लाइट बार-बार आ जा रही थी दो दोस्तो ने शर्त लगायी कि आधे मिनट मंे लाइट आयेगी या नही भाग्यवश लाइट आ गयी और वे दौने शर्त पर लगी धनराशि के आदान-प्रदान पर नोकझोक करने लगे लाईट के आने जाने के समय के पैर्टन मंे समानता नही थी मैने उन्हे अनिश्चितता से भरी चीजो पर शर्त लगाने को मना किया वे वोले इसमें क्या गणित है ये तो मुझे सहसा एक कहानी याद आ गयी जिसमें एक राजा के दरबार में एक साधारण सा व्यक्ति पहुचा उससे राजा ने पूछा कहो क्या चाहते हो उसने कहा मेैं एक साधारण सा आदमी हॅू मेरी आवश्यकता भी साधारण सी है पर मै जो मागूगां वो आप दे नही पायेगे राजा को यह बात चुभ गयी वोला जो मांगना है मांग लो हीरे-जवाहरात मोती माणिक्य और आधा राज्य तक मै दे सकता हॅू वो वोला महाराज मेरी मांग तो बहुत ही छोटी है क्या आप पूरी कर पायेगे राजा बोला मै वचन दे चुका हॅू बोलो तुम्हारी वो छोटी सी मांग क्या है उस व्यक्ति ने कहा महाराज आप शतरंज तो खेलते होगे राजा ने कहा हाॅ तो महाराज मुझे बस इतना चाहिये कि शतरंज मंे 64 खाने होते है उसके एक खाने में एक चावल का दाना उसके दूसरे खाने में दुगने ...
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27/07/2020 आज का दिन और दिनो से भिन्न था अखबार उठते ही सनत शास्त्री के दिवंगत होने की खबर मिली वे समाजसेवी और मृदभाषी थे वे किसी का भी देहान्त हो उसके यहाॅ भाई की तरह खडे रहते थे उसे कन्घा जरूर देते थे सनातन धर्म मे किसी अर्थी को कंधा देना पुण्य का काम माना जाता है आज उन्हे ही किसी अंतरंग के कन्धे का इंतजार था महाभारत में लिखा है कि सात कदम साथ-साथ जो चले वो मित्र होता है काॅलेज के जमाने से ही मै सनत जी को जानता था वे छात्र राजनीति में सक्रिय थे और मै भी हाॅ हमारे लक्ष्य जरूर अलग-अलग थे वे काग्रेस के राज्य के सचिव पद पर भी आसीन रहे। हाॅ पर मै बात कर रहा था कि कैसे एक व्यक्ति हमारे बीच से चला जाता है यह कोई मायने नही रखता हम बरबस ही अपने वर्तमान को कोसते है कि हमने जो सपने युवावस्था में देखे होते है उनसे हम चार कदम दूर होते है और इसी नैरश्य में अपने आज को कोसते रहते है कि काश ऐसा होता तो कैसा होता यदि होता किन्नर नरेश मै आसमान में रहता सोने का सिहासन होता सिर पर मुकुट चमकता .......................................... जैसे हम युवावस्था में सपने देखते है कि सारे समाज में आदर्शवाद ...
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19/07/2020 आज डयूटी जाने से पहले रास्ते में वारिश हो रही थी एक तेज रफ्तार आॅडी कार बाला तेज आवाज में ये रेशमी जुल्फे ये शरवती आॅखे गाना बजा रहा था। कुछ ही गाने होते है जिन्हे सुनने के लिये थोडी देर रूका जा सकता है ये गाना भी कुछ इसी तरह का है। मै ये देख नही पाया कि वो ड्राइवर था या खुद मालिक कार चला रहा था ये मेरा पसंदीदा गाना है और मुहम्मद रफी जी ने वडे प्यार से गया और सार्वकालिक मेरे प्रिय संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संगीत मं ढाला है वारिश के मौसम में ऐसा गाना सुनना सुखद अहसास है । (ये सही है कि आॅडी वाला अभी-अभी रईस हुआ था क्योकि हाॅल ही मे रईस हुये लोग ही तेज आवाज में तेज रफ्तार में गाने सुनते है )खैर मुझे अपने गुरूजी द्वारा सुनाई गयी कहानी याद आ गयी वो वाकया भी मजेदार था क्लास के लडके ने लडकी को कुछ कह दिया था तो लडकी बोली गुरूजी ये लडके जंगली होते है काश ये जंगल में में पढ रहे होते तो कितना अच्छा होता गुरूजी वोले तुम्हे एक कहानी सुनाता हॅू एक गुरूकुल मे जन्म से ही लडको को प्रवेश दिया जाता था उनके आश्रमें में स्त्रीयों का प्रवेश नही होता था सभ...
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18/07/2020 आज रेलवे के किनारे-किनारे अपने बालक के साथ टहल रहा था अचानक उसने एक चमकीला सा पत्थर उठा लिया और कहने लगा पापा ये क्या हीरा तो नही हो सकता मै भी उस पत्थर की चमक से अभिभूत था तभी सोचा क्यू मानव जाति चमकीले पत्थरो से प्यार करती है अचानक कोहनूर हीरे का ध्यान में आ गया हालाॅकि हमे जो पत्थर मिला था उसकी चमक धुधली और बेनूर थी पर कोहनूर तो कोहनूर था बेकीमती और वेमिसाल कहा जाता है कि उसकी कीमत को आंकने का यह पैमाना था कि उससे सारी धरती के वासिन्दो को एक दिन का भरपेट भोजन कराया जा सकता है उसके साथ भी मिथक जुडे थे कि वो जिसके पास भी रहेगा उसका सामराज्य डूब जायेगा यह उससे विरक्ति के लिये था या फिर उसकी सुरक्षा के लिये लेकिन यह भी सत्य है कि व्रिटिश सत्ता के पास कोहूनर आने के बाद भारत से उसका अंत हो गया ।और देशो की भी सत्ता सदा के लिये चला गयी। चलते-चलते मैने एक और काला पत्थर देखा जो संभवतह जब कोयले के इंजन चला करते थे तब गिरा होगा उसे ध्यान से देखने में उसमें पत्ती जैसे कुछ खाचे बने हुये थे मैने वेटे से कहा वेटा देखो मै यह तो नही जानता कि जो चमकीला पत्थर तुम्हे मिल है उसक...
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17/07/2020 आज व्टसएप गु्रप पर एक कहानी पढी एक वैद्य जी थे वे उतना ही दवाई का पैसा लेते जितने से उनके घर का दैनिक खर्च चल सके उनका कम्पाउंडर उन्हे इत्तला कर देता कि महाराज आज के खर्च का कोटा पूरा हो गया । उनकी पत्नी रोज अपनी आवश्यक सामान की सूची वैद्य जी को सुबह ही दे देती वैद्य जी रोज पर्ची देखते शाम को दैनिक खर्च के हिसाब से पैसे आ ही जाते वैद्य जी ने किसी से दवा के पैसे नही मांगे। वैद्य जी पत्नी की मांगी पर्ची को भगवान के सामने रख देते। एक दिन पत्नी ने जो पर्ची दी तो वैद्य जी को पसीने आ गये उसमे सूचना थी कि अपनी लाडली का विवाह है कैसे होगा वैद्य जी चिन्तातुर थे तभी एक उघोगपति आया और बोला वैद्य जी आपने मेरा लाइलाज रोग दूर किया था जिसपर मै लाखो रूपये खर्च कर चुका था आपकी लडकी का विवाह का सारा खर्च मै उठाउगा ।वैद्यजी बोले कैसी प्रभु की माया है आज ही पत्नी ने पर्ची में लिखा था की लडकी का विवाह है यह कह कर उन्होने उघोगपति को पर्ची दिखाई। यह उसकी आस्था की पराकाष्ठा थी कि भगवान ने उसकी समस्या सुन ली तथा समाधान दे दिया। अब हम कहानी से निकल कर व्यवहारिकता की बात करते है। 1.क्या भगवा...