03/08/2020
मै चाय की दुकान पर खडा था मेरे पास आकर उसने पीछे से कंधे पर हाथ रखा और कहने लगा यार खाना खिला दो उसके कपडे वेतबरीब ढंग से बस टंगे हुये थे और गिर जाना ही चाहते थे। बाल बढ कर रस्सी हो गये थे मैने चाय बाले से उसके लिये फुल प्लेट चावल लगाने को कहा मैने पूछा तो चाय बाला कहने लगा कि साहब इसका पूरा परिवार खत्म हो चुका है और उसके गम मे यह पागल हो गया । रात को ये मेरी दुकान के आगे ही सो जाता है इससे मेरी दुकान की रखवाली हो जाती है मुझे उस पर दया आने लगी और सोचने लगा कि मैने कितने लोगो को देखा है जो मानसिक रूप से कमजोर या विक्षिप्त थे सबसे पहले आई0डीपी0एल मे एक पागल को बचपन में देखा था उस समय माॅ कहती थी कि ये आदमी जो पागल की तरह दिखता है पागल नही है पर सब उसे पागल ही कहते थे एक दिन पता चला कि उसे पुलिस ने पकड लिया है उसके पास से ट्रान्समीटर बरामद हुआ है जो उसने पुलिया के नीचे छुपा रखा था उस समय मुझे पता चला कि आर्मी इैलेक्ट्रिाॅनिक सर्विलांस भी करती है और उसी के तहत वो पगाल पकडा गया वो जासूस था। ऐसे में कई फिल्मे दिमाग में आने लगी जहाॅ असाधारण अभिनय करने बाले अभिनेतओ ने अपनी अभिनयन क्षमता का लोहा मनबाया इसमें नाना पाटेकर का नाम प्रमुख है। वैसे अगर हम ऐस्ट्रोलाॅजी के आधार पर देखे तो जिन जातको का चंद्र क्षीण या पापग्रह युक्त होता है उन्हे मानसिक उददीप्पन होता ही है इसकी तीव्रता ग्रह के आधार पर कम या ज्यादा हो सकती है। अगर इसका परीक्षण करना है तो किसी मानसिक आरोग्यशाला में जाकर आप अध्ययन कर देख सकते है कि पागल पूर्णिमा के आसपास सबसे ज्यादा व्यथित रहते है। हमारे देश में भी कुछ ऐसी जगह है जहाॅ के निवासीयो को इसी नाम से नबाजा जाता है कक्षा 6 की कला कुसम चित्रकला की किताब में रोड के किलोमीटर बताने वाले स्टोन को भगवान मान भोगाव का आदमी पूजाकर रहा होता है। आपके भी आस-पास ऐसे इलाके होगे जहाॅ के सूरवीरो को इसी नाम से नबाजते होगे चलो यह तो हुई हंसी की बात ं
वैसे इस प्रकार के लोगो को मुक्तावटी और मोती की भस्म से फायदा होता है तथा मोती की माला पहनने से लाभ देखा गया है। इनके लिये प्यार और सहानभूति सर्वश्रेष्ठ टाॅनिक है। इस समय मुझे भारत के महान वैज्ञानिक डा0वरिष्ठ नरायण की याद आ रही है जिनकी मेद्या ने अमेरिका में भी धूम मचा दी थी उनकी प्रतिभा की यह एक बानगी भर ही है कि जब अपोलो मिशन के दौरान कुछ क्म्प्यूटर कुछ समय के लिये बंद हो गये तो उस समय तथा तब जब क्म्प्यूटर आॅन हुये तो उनकी गणना और डा0 साहब की गणना में कोई अन्तर नही था इतनी सटीक गणना उन्होने की थी पर उनका वैवाहिक जीवन उनके वैज्ञानिक जीवन पर भारी पडा और उनकी पत्नी उन्हे छोड कर चली गयी वे टूट गये और उनकी दशा पागल जैसी हो गयी। मस्तिष्क के कुछ भाग के त्रीव प्रतिक्रिया और कुछ के न करने जैसा कुछ भी कभी भी हो सकता है प्रबल इच्छाशक्ति वाले भी विकट परिस्थिति में टूट सकते है। इससे उबरने का बस यही मंत्र है कि सभी परिस्थितियों मे ंहम सम रहे और मध्यमार्ग को अपनाये मन को न ज्यादा ढील दे न ज्यादा कसे मस्त रहे व्यस्त रहे। और अंत में ये दुनियां पागल है या फिर मैं दीवाना...............

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