16/08/2020
होटल में मरियल सा दिखने वाला आदमी मुझसे खाने के पैसे मांगने लगा मैने होटल वाले को कह दिया यार इसे एक प्लेट लगा देना उसके खाना खा लेने के बाद मेरे बालक ने मुझे कहा कि लगता है कि अभी इसका पेट नही भरा शायद कई दिनो से भूखा है मेने होटल वाले को एक और प्लेट उसे देने को कहा और उसका पैसा चुका कर घाट की ओर चल दिया वहाॅ कोई सज्ज्न भंडारा करा रहे थे और भिखारियो का झुंड उन्हे घेरे खडा था कई भिखारी अपनी खुराक से भी ज्यादा ले चुके थे और और ज्यादा लेने के लिये लड रहे थे मेरे बच्चे ने पूछा कि खाना वडे वर्तन में प्रयाप्त है िफर भी ये लड रहे है तो मैने कहा कि ये असुरक्षा का मामला है आज का तो पेट भर जायेगा पर कल का क्या पता कोई सेठ आता है या नही और तडगे भिखारी कमजोर भिखारी को धक्के मार कर भीड से अलग कर दे रहे थो मानो सारे खाने पर उनका ही अधिकार हो मैने बालक से कहा कि वेटा हमारी संस्कृति तो कम खाओ और गम खाओ के दर्शन पर आधारित है अगर कम खाओगे तो रोग भी कम ही होगे वरना मोटापा और न जाने क्या-क्या होता रहेगा मैने उसे एक कहानी सुनाई कि एक व्यापारी को तुरतं और कमाई का लालच था उसने कई पीपे शहद खरीद लिया और दूसरे देश उसे बेचने निकल पडा एक जगह गढढा आने से वैलगाडी असंतुलित हो गयी और पीपे गिर पडे एक पीपे से शहर रिस कर फैल गया उसने कुछ देर बाद देखा कि उस शहद पर मक्खीयां आने लगी है उन्होने खूब जमकर शहद पिया और कुछ के पैर और पर उसी में गीले हो गये और अब वे उड नही पा रही थी कई मक्खियों की क्रब वही बन गयी व्यापारी ने सीख ली कि ज्यादा लालच करना ठीक नही अगर मक्खियां अनुशासित होकर किनारे से प्रेमपूर्वक शहद ग्रहण करती तो शायद वे अपनी जान न गवाती इस विश्व में उतने भूख से नही मरते जितने आधिक खाने के दुश्प्रभावो से मरते है।
Comments
Post a Comment