14/08/2020
आज पडोसी के बच्चे 4 तोते के बच्चे लेकर आये और कहने लगे कि अंकल एक तोते का बच्चा आप भी पाल लो मै पक्षियों की आजादी का पक्षधर हूॅ मैने मना कर दिया पर मेरी पत्नी और बच्चे कहने लगे कि पाल लेते है वैसे भी पडोसी के धर पलेगे तो राम-राम तो कहेगे नही आप खुद ही समझ गये होेगें कि पडोसी कैसे है पर मेरा अटल विश्वास है कि किसी को भी बंधन में नही रखना चाहिये वे आकाश में परवाज के लिये बने है उन्हे उडने दो उनके पंखो को विस्तार दो पर मै अपने बच्चे के वाक्य से अंचंभित हुआ जिसने कहा था कि पडोसी के धर पलेगे तो राम-राम तो नही कहेगे क्योकि उनके घर में सुप्रभात ही उठो लाल अब आखे खोलो दारू लाई हूॅ मुह धो लो से होती है और सारे दिन मरा-मरा जपते है। मुझे छोटू की बात सुनते ही कहानी याद आ गयी एक राजा शिकार खेलने जंगल गया तभी उन्होने तोते की आवाज सुनी राजा का काफिला आ रहा है इन्हे लूट लो मजा आयेगा राजा के सैनिक संख्या में कम थे अतः वे भागने लगे भागते-भागते दूर निकल आये थोडा सुस्ताने लगे तभी एक तोेते की आवाज आयी राजन आओ साधु की कुटिया मे आपका स्वागत है वैठो और जलपान ग्रहण करो राजा को बडा आश्चर्य हुआ कि एक तोते ने तो लूट ही लिया था और दूसरा तोता कुटिया में स्वागत कर रहा है राजा में मंत्री ने कहा हे राजन ये संगति का ही असर है कि जो तोता डाकूओ के साथ था उसे उसी कर्म में मजा आता था और जो साधु के पास था उसे सत्कर्म में मजा आ रहा था ।
कहते हे कि शकराचार्य ने जब संस्कृत के वि़द्धान मंडन मिश्र से मिलने के लिये पता पूछा तो उन्हे बताया गया कि जिस घर में तोते भी संस्कृत मंे संभाषण कर रहे हो वही समझना कि मंडन मिश्र का घर है।
आज पडोसी के बच्चे 4 तोते के बच्चे लेकर आये और कहने लगे कि अंकल एक तोते का बच्चा आप भी पाल लो मै पक्षियों की आजादी का पक्षधर हूॅ मैने मना कर दिया पर मेरी पत्नी और बच्चे कहने लगे कि पाल लेते है वैसे भी पडोसी के धर पलेगे तो राम-राम तो कहेगे नही आप खुद ही समझ गये होेगें कि पडोसी कैसे है पर मेरा अटल विश्वास है कि किसी को भी बंधन में नही रखना चाहिये वे आकाश में परवाज के लिये बने है उन्हे उडने दो उनके पंखो को विस्तार दो पर मै अपने बच्चे के वाक्य से अंचंभित हुआ जिसने कहा था कि पडोसी के धर पलेगे तो राम-राम तो नही कहेगे क्योकि उनके घर में सुप्रभात ही उठो लाल अब आखे खोलो दारू लाई हूॅ मुह धो लो से होती है और सारे दिन मरा-मरा जपते है। मुझे छोटू की बात सुनते ही कहानी याद आ गयी एक राजा शिकार खेलने जंगल गया तभी उन्होने तोते की आवाज सुनी राजा का काफिला आ रहा है इन्हे लूट लो मजा आयेगा राजा के सैनिक संख्या में कम थे अतः वे भागने लगे भागते-भागते दूर निकल आये थोडा सुस्ताने लगे तभी एक तोेते की आवाज आयी राजन आओ साधु की कुटिया मे आपका स्वागत है वैठो और जलपान ग्रहण करो राजा को बडा आश्चर्य हुआ कि एक तोते ने तो लूट ही लिया था और दूसरा तोता कुटिया में स्वागत कर रहा है राजा में मंत्री ने कहा हे राजन ये संगति का ही असर है कि जो तोता डाकूओ के साथ था उसे उसी कर्म में मजा आता था और जो साधु के पास था उसे सत्कर्म में मजा आ रहा था ।
कहते हे कि शकराचार्य ने जब संस्कृत के वि़द्धान मंडन मिश्र से मिलने के लिये पता पूछा तो उन्हे बताया गया कि जिस घर में तोते भी संस्कृत मंे संभाषण कर रहे हो वही समझना कि मंडन मिश्र का घर है।

Good
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