आज मेरे मित्र ने मुझे फोन किया कुछ देर बाद उनका सामना मेरे से हो गया वे बोले यार मैने तुम्हे फोन किया था फोन क्यो नही उठाया मैने जेब टटोली मेरा फोन नदारद था मैने कहा यार फोन टेबल पर रखा है वे नाराजगी व्यक्त करने लगे मैने विन्रमतापूर्वक कहा मित्र मेरी सलाह मानो एक माह तक फोन का उपवास रख लो फिर चाहे करबाचैथ का ब्रत कर लेना वे समझ नही पाये और बोले क्या शिवाजी मैने कहा हाॅ मै सच कह रहा हॅू जब भी मुझे साधना करनी होती है तो मै एक माह का फोनकटवा ब्रत रख लेता हॅू वे बडे आश्चर्य से देखने लगे मैने उन्हे अपने कालेज टाइम की मिमकी की याद दिलाई मैने कहा दोस्त काॅलेज में माइम का कम्पटीशन था सब लोग परेशान थे कि क्या किया जाये मैने कहा कि मै पट कथा लिखता हॅू तुम बस मूक अभिनय  करना । कहानी की शुरूआत डाक्टर साहब के सुबह-सुबह उठने से होती है फोन की घंटी बजती है गाना चलता है  उठो लाल अब आंखे खोलो फोनबा लायी हॅू मुॅह से कुछ तो बोलो डाक्टर साहब अलसाये से फोन उठाते है एक मरीज उनसे मिलना चाहता है उसकी हालत खराब है डाक्टर साहब जल्दी से कुल्ला करते है तब तक एक और फोन की धंटी बजती है ब्रशकरते करते डाक्टर साहब बतियाते है उसके बाद टाॅयलट में जाते है एक और धंटी बजती है डाक्टर साहब जल्दी से बाहर आ जाते है इसके बाद मरीज के वेहोश होने का सीन है वेहोश मरीज को आपरेशन थियेटर मे ले जाते है जहाॅ आपरेशन करते करते मरीज का भी मोबाइल बज उढता है रिंगटोन इस प्रकार है कहाॅ जाते हो रूक जाओ तम्हे मेरी कसम देखो डाक्टर साहब उसकी जेब से फोन निकाल कर दूर रख देते है डाक्टर साहब आधी नीद में होेते है अतः आपरेशन करते करते मरीज के पेट  में अपना मोबाइल रख कर भूल जाते है मरीज आपरेशन थियेटर मे ंमर जाता है मरीज को दफनाने लोग ले जाते है जैसे ही कब्र की मिटटी खोद कर मरीज को रखते है मरीज के अन्दर से फोन की धंटी बजने लगती है लोग भूत-भूत कह कर भाग जाते है। मित्र फोन हमारी जिन्दगीयो मे इस तरह शामिल हो गया है जैसे रोटी पानी कुछ देर तो मियां अपने खुद के लिये वक्त निकालो फोन का मतलब है एक ऐसा आदमी जो आपको गुलाम बना रहा है चाहे वो किसी का भी हो जब फोन नही थे आदमी उमुक्त था न हार्ट अटैक था न नीद न आने की बीमारी ये चलन तो फोनमयी जिन्दगी ने ही दिये है। और हाॅ मूक अभिनयनाटक ने बहुत प्रसंसा बटोरी और प्रथम स्थान प्राप्तकिया मित्र तुम कब फस्ट आओगे।


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