27/07/2020
आज का दिन और दिनो से भिन्न था अखबार उठते ही सनत शास्त्री के दिवंगत होने की खबर मिली वे समाजसेवी और मृदभाषी थे वे किसी का भी देहान्त हो उसके यहाॅ भाई की तरह खडे रहते थे उसे कन्घा जरूर देते थे सनातन धर्म मे किसी अर्थी को कंधा देना पुण्य का काम माना जाता है आज उन्हे  ही किसी अंतरंग के कन्धे का इंतजार था महाभारत में लिखा है कि सात कदम साथ-साथ जो चले वो मित्र होता है काॅलेज के जमाने से ही मै सनत जी को जानता था
वे छात्र राजनीति में सक्रिय थे और मै भी हाॅ हमारे लक्ष्य जरूर अलग-अलग थे वे काग्रेस के राज्य के सचिव पद पर भी आसीन रहे। हाॅ पर मै बात कर रहा था कि कैसे एक व्यक्ति हमारे बीच से चला जाता है यह कोई मायने नही रखता हम बरबस ही अपने वर्तमान को कोसते है कि हमने जो सपने युवावस्था में देखे होते है उनसे हम चार कदम दूर होते है और इसी नैरश्य में अपने आज को कोसते रहते है कि काश ऐसा होता तो कैसा होता यदि होता किन्नर नरेश मै आसमान में रहता सोने का सिहासन होता सिर पर मुकुट चमकता ..........................................
जैसे हम युवावस्था में सपने देखते है कि सारे समाज में आदर्शवाद स्थापित हो गया है और इस सुखद परिवर्तन का कारण मै ही हॅू। हमारे चले जाने के बाद भी दुनिया वैसी ही होगी जैसा इसे होना है हम इसके कुछ भाग के परिवर्तन का कारण ही बन पाते है यह उतना ही सूक्ष्म होता है जैसे हम विकास की होड में जलवायु परिवर्तन को नही देख पाते और देख भी कैसे सकते है हम विरासत मे ंतो कुछ पाते ही नही है जीवन के सधर्ष में पहले तो अपने आप को बचाने की जुगत रहती है और जब अपने लिये खाने कमाने का जुगाड हो जाता है तो परिवार आता है फिर समाज को देने की बारी आती है जो प्रायः समयाभाव के कारण हो नही पाती एक शेर याद आ रहा है कि यू तो मुझे भी फ्रिक थी अपने देश की पर जब पेट भर गया तो मुझे नीद आ गयी ----------------------
मै एक ऐसे शक्ख को जानता हॅू जो अभी हाॅल ही में चीन के आक्रमण के बाद सस्ती लोकप्रियता के लिये कहने लगा कि मै सारी समपत्ति देश के नाम कर दूगा पर आप मुझसे वेहतर जानते है कि वो कितना सही होगा.....................................................................
आप भी सोच रहे होगे कि कहाॅ का दशर्न लेकर वैठ गया पर आदमी शमशान घाट मे ही सर्वाधिक दाशर््िानिक होता है ओशो इसी कारण शमशान की खाक छानने रहते थे वे इस शरीर रूपी संगठक, भौतिक तत्व और चेतना के सन्दर्भ कोे जानना चाहते थे। अभी आॅखो में नीद आ रही है मौत की छोटी वहन तो चलो सोता हॅू कल दिन के  सूरज से करेगे सकारात्मक बाते...........................
शुभरात्रि

Comments

Popular posts from this blog