08/07/2020-


एकाउंट सेक्शन में पता करने गया कि पिछले चुनाव का पैसा आया कि नही एकाउंटेन्ट ने बताया कि पैसा पहुच चुका है। वहाॅ आज के  दैनिक जागरण के पेज पर नजर पडी  जिसमें बताया गया कि  15 जुलाई से चैरासी कुटी के दीदार कर सकेगे। चैरासी कुटी का इतिहास काफी रोचक है इसके संस्थापक महेश योगी ने ऋषिकेश में गंगा के उस पार साधना की और उन्हे कुछ आधात्मिक अनुभव हुये जिसे वे सारे संसार को अवगत कराना चाहते थे उन्होने ओम के आकार की 84 कुटिया साधना के लिये तैयार की उस पर काफी पैसा भी खर्च हुआ पर  महेश योगी ने अपना आशियाना छोड दिया और दिल्ली के पास  रहने लगे आप सोच रहे होगे कि मै यह कहानी क्यो सुना रहा हूॅ लेकिन  इसके पीछे कुछ तर्क है जिन्हे आप ने अनुभव किये हो तो मुझसे भी साझा करे। चैरासी कुटी छोडने के पीछे उनका तर्क था कि वो वास्तु के अनुसार नही बनी है। उनकीे आध्यात्मिक यात्रा तथा प्रसि़ि़द्व का अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि अमेरिका में उन्होने अपने भावातीत ध्यान को बहुत बडे स्तर पर फैला दिया और शायद जहाॅ तक मुझे याद है कि उन्होने अमेरिका के चुनाव में अपने आध्यात्मिक शिष्यो को उतारा यह अलग बात है कि परिणाम क्या रहा । हाॅ तो मै वास्तु की बात कर रहा था इसका प्रभाव पडता है हमारे देश मंे पुरानी इमारते, किले, मंदिर आदि वास्तु अनुरूप बने है। पर मै ठहरा विज्ञान का विद्यार्थी सो सोचा कि परीक्षण करूगा।यह अवसर भी मिल ही गया जिस चुनाव की मै बात कर रहा था उसी चुनाव में मुझे ऐसे पहाडी इलाके में जाने का अवसर मिला जहाॅ एक गाॅव का मुख पुर्व दिश की तरफ था तथा दूसरे गाॅव का मुहॅ दक्षिण दिशा की तरफ था पहला गाॅव और सडक वास्तु के हिसाब से उपयुक्त थी उस गाॅव में संम्पन्न लोग थे तथा पढे लिखे भी ज्यादा थे उनके गाॅव से विदेशो तक मे नौकरी करने बाले लोग थे पर दूसरे गाॅव जो वास्तु अनुसार नही था उसके रहने बाले ज्यादतर लोग अंगूठा छाप थे और अपने हस्ताक्षर भी नही कर पा रहे थे उनकी सेहत भी अच्छी नही थी । यह शायद वास्तु के वैज्ञानिक परीक्षण की जीवित प्रयोग शाला है कोई अगर अनुसंधान करना चाहता है तो मै उसका साथ देने के लिये तैयार हूॅ और हाॅ ....... एक बार हाॅ करने से पहले सूरजमुखी के फूल को जरूर याद कर लेना।
आमीन!

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