13/07/2020
आज का दिन बच्चों को समर्पित था शाम के समय उन्हे पास के जंगल मे ले गया जहाॅ उन्होने खूब मजे किये वे कन्क्रीट के जंगल से निकल कर प्रकृति की गोद में सांस ले रहे थे। यहाॅ वे कहने लगे कि मेडीटेशन किया जा सकता है तो मैने उन्हे बताया कि जैसे जवाहल लाल कहा करते थे कि पहाड दिन में जितने मित्रवत और सुखदायी होते हेै रात में उतने ही भयंकर और दुखदायी होते है। उन्हे देखना सुखद है वे आॅखो के लिये टाॅनिक के समान है पर उसमें रहना और अपने अतित्व को बनाये रखना बहुत दुरूह कार्य है वच्चे पेड पर चढे और उन्होने जीवन कौशल का एक अध्याय सीखा उन्होने जमकर फोटोग्राफी की और मैने उन्हे फोटो का अर्थ समझाया फोटो का मतलब लाइट फोटो का शाब्दिक अर्थ लाइट ही होता है। उन्हे लाईट के सामने और पीछे दौनो तरह से शाट लेना समझाया और उनसे पूछा कि तुम टाइगर को किससे शूट करना पंसद करोगे कैमरे से या गन से और जबाब मेरे मन का ही आया आप समझ ही गये होगे । उन्हे जंगल की आवाज को रिकार्ड करने को कहा ताकि वे जंगल की यादे अपने साथ ले जा सके और जब मेडिटेशन करने का मन करे तो उसे सुने
जंगल में हाथी वहुत लो फ्रिक्ेन्सी की आवाज उत्पन्न करते और इससे ही आपस में संवाद करते है हाॅर्न या तेज आवाज उन्हे कर्कश लगती है और वे उससे बचना चाहते है ऐसा ही आपने दीवली पर कुत्तो के व्यवहार में देखा होगा।मुझे लगता है कि शहर की जटिलताओ से ज्यादा जटिल जंगल का पारस्थिक तंत्र है हमे तो सुसंस्कृत होन के नाते पुलिस या एक नैतिक लोगो का तंत्र मिला हुआ है लेकिन जंगल मे ंतो बस डारविन का योग्यतम की उत्तरजीविता का सिद्वान्त ही चलता है कि जिसकी लाठी उसकी भैस शायद इसी कारण लोकतंत्र की विसंगतियो को जंगलराज भी कहते है।

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