18/07/2020

आज रेलवे के किनारे-किनारे अपने बालक के साथ टहल रहा था अचानक उसने एक चमकीला सा पत्थर उठा लिया और कहने लगा पापा ये क्या हीरा तो नही हो सकता मै भी उस पत्थर की चमक से अभिभूत था तभी सोचा क्यू मानव जाति चमकीले पत्थरो से प्यार करती है अचानक कोहनूर हीरे का ध्यान में आ गया हालाॅकि हमे जो पत्थर मिला था उसकी चमक धुधली और बेनूर थी पर कोहनूर तो कोहनूर था बेकीमती और वेमिसाल कहा जाता है कि उसकी कीमत को आंकने का यह पैमाना था कि उससे सारी धरती के वासिन्दो को एक दिन का भरपेट भोजन कराया जा सकता है उसके साथ भी मिथक जुडे थे कि वो जिसके पास भी रहेगा उसका  सामराज्य डूब जायेगा यह उससे विरक्ति के लिये था या फिर उसकी सुरक्षा के लिये लेकिन यह भी सत्य है कि व्रिटिश सत्ता के पास कोहूनर आने के बाद  भारत से उसका अंत हो गया ।और देशो की भी सत्ता सदा के लिये चला गयी। चलते-चलते मैने एक और काला पत्थर देखा जो संभवतह जब कोयले के इंजन चला करते थे तब गिरा होगा उसे ध्यान से देखने में उसमें पत्ती जैसे कुछ खाचे बने हुये थे मैने वेटे से कहा वेटा देखो मै यह तो नही जानता कि जो चमकीला पत्थर तुम्हे मिल है उसकी कीमत क्या होगी पर मै जानता हॅू कि ये कोयले  बाला पत्थर यकीनन सूचना का जीवित दस्तावेज है इसमें  जुरेसिक, ट्रयेसिक या मीसोजोइक काल की वनस्पति है जिसका अध्ययन किया जा सकता है यह समय की रेत पर पडे हुये जीवित निशान है और मै अपनी पढाई के पिछले समय में यात्रा करने लगा जब हमें किस्ट्रलोगा्रफी में पढाया जाता था कि मैग्मा(ज्वालामुखी) में रासायनिक क्रिया के कारण  चमकीले पत्थरो का निमार्ण होता है ,और हीरा क्या है कार्बन से बना प्रतिरूप है जो बहुत अधिक ताप और दाब पर बनता है। क्या ये व्रिटिश अधिकारियो को मालूम नही था या कोहनूर हीरे का इतना आर्कषण था कि उसके बदले राज्य दिये जा सकते थे। एक पत्थर का क्या इतना मोल हो सकता है कि उससे मानव जिन्दगी खरीदी जा सके जी हाॅ आज भी हीरे का इतना ही मोल है एक आदमी जीवन भर इतना नही कमा सकता जितना की एक हीरे का मूल्य हो सकता है हीरे को शुक्र ग्रह का प्रतीक भी माना जाता है अमीरी को प्रर्दशित करने का यह
भौडा ढोग है। सोने से ज्यादा पंसद किये जाने बाला हीरा अपने नाम को सदा सार्थक कर रहा होता है कि हीरा है सदा के लिये हाॅलाकि लैब में भी कृत्रिम हीरे का निर्माण होता है पर यह मंहगा पडता है लैब में बने हीरे और कृत्रिम हीरे की आभा में अंतर नही होता जब तक हीरे के निर्माण की सस्ती तकनीक नही आती तब तक है हीरा सदा के लिये ............................
हीरे से जुडी किस्सागोई भी हमारे समाज में खूब प्रचलित है एक गुरूजी ने शिष्य को सिखाने के मकसद से चमकीला पत्थर दिया और उसे बाजार भेज दिया कहा इसकी सही कीमत का पता लगाओ वो लोहार पर गया उसने कहा 2रूमें खदीदूगा मेरे बच्चे खेलते रहेगे कुम्हारे कहा 4 रूपये मे खरीदूगा मेरा बनायी सुराही मे अच्छा लगेगा और अच्छे दाम मिलेगे कबाडी ने कहा 100 मे खरीदूगा और आगे बेच दूगा बनिये ने कहा 1000 मे खरीदूगा इस प्रकार उसके दाम बढते गये अंत में राजा के पास पहुचा राजा ने कहा 100 गाॅव दे दूगा और इसे अपने ताज में लगाउगा। शिष्य बापस गुरूजी के पास आ गया और एक वेहतरीन सबक सीख लिया जौहरी ही हीरे की असली कीमत जानता है गधे को मालकौस राग सुनाओगे जो भैस के आगे बनी वाली गति ही होगी।सही समय और सही आदमी के पास जाओगे तो तम्हार लाभ ही होगा।
पत्थर से जुडी एक और घटना याद आ  रही है शिवाजी ने छत्रपति का ताज घारण कर लिया और अपने गुरू रामदास के पास गये गुरू समझ गये कि चेला जगत की चमक में खो गया है उन्होने एक पत्थर शिवाजी को दिया और कहा इसे तोडो पत्थर को तोडने पर उसमें से मेढक निकला जो संभवतहः हाइबरनेश शीत निद्रा में सो रहा होगा। एक पत्थर जो भौतिकता का प्रतीक है और एक पत्थर जो गुरू के पास है उसमें जीवंतता है उसमें कौन से बीच छुपे है कौन जानता है? कम्पयूटर साइंस(आई0आई0टी0) सिखाने बाले शिष्य को दो करोड सालाना का पैकेज मिलता है और गुरूजी दाल रोटी खा रहे होते है।अतः हीरा सदा के लिये ............................

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