09/07/2020---
आज पत्नी की तबीयत नासाज सी थी सो बाॅस को फोन किया कि थोडा लेट आ पाउगा ।अस्पताल के लिये पैसे भी निकालने थे सो घर के पास डाकघर में चला गया तभी कुछ पुरानी यादे ताजा हो गयी। डाकघर ही उनका आशियाना था वे दो अधेड उम्र के मांग कर खाने बाले पति-पत्नी आखो के सामने घूम गये। उस जोडो में पति बीमार रहता था पत्नी ने उसके लिये जुगाड कर फटटो और पहियों को जोड कर चलने बाली गाडी बना दी। उसमें एक डोरी भी बाॅध दी जैसे जन्म-जन्म का साथ हो। दौनो में बहुत प्यार था पति अक्सर गाडी में ही वैठा
रहता पत्नी आस-पडोस में मांग की लाती और चूल्हे पर रोटी पका कर पति को दे देती पति भी तब तक नही खाता जब तक पूरी रोटियां न बन जाये दौनो मिल कर रूखी-सूखी खाॅ कर जिन्दगी की गाडी चला रहे थे पति बीमार ही रहता था सो पत्नी उसका खास ख्याल रखती। ऐसा लगता था कि आराम से ये अपना बुढापा काट लेगे। उनसे कोई उनकी कहानी पूछता तो हंस कर टाल देते पता ही नही चलता कि उनका क्या इतिहास है। जिन्दगी ऐसी सरल भी न थी एक दिन एकाएक पत्नी भगवान के पास लम्बी यात्रा पर चली गयी। सब यह ही सोच रहे थे कि पति तो बीमार रहता था पर पत्नी पहले चली गयी। अभी उसकी चिता की आग ठंडी नही हुई थी कि लोगो ने देखा कि पति ने भी आखिरी सांस ले ली। इसे क्या कहेगे .........1-विधि का विधान कि पति-पत्नी एक ही दिन  साथ-साथ गये। 2-सबकी सांसे गिनती की है 3-उसकी मर्जी के वगैर पत्ता भी नही हिलता 4-हंस के जोडे को आदर्श माना जाता है कि उसमें से यदि एक मर जाये तो दूसरा जिन्दा नही रहता। और प्यारे जोडे को हंस का जोडा ही भेट किया जाता है। क्या दिवंगत पति -पत्नी को किसी ने हंस का जोडा भेट किया होगा शायद हाॅ या शायद नही.................................................

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