28/07/2020 आज आॅफिस में लाइट बार-बार आ जा रही थी दो दोस्तो ने शर्त लगायी कि आधे मिनट मंे लाइट आयेगी या नही भाग्यवश लाइट आ गयी और वे दौने शर्त पर लगी धनराशि के आदान-प्रदान पर नोकझोक करने लगे लाईट के आने जाने के समय के पैर्टन मंे समानता नही थी मैने उन्हे अनिश्चितता से भरी चीजो पर शर्त लगाने को मना किया वे वोले इसमें क्या गणित है ये तो मुझे सहसा एक कहानी याद आ गयी जिसमें एक राजा के दरबार में एक साधारण सा व्यक्ति पहुचा उससे राजा ने पूछा कहो क्या चाहते हो उसने कहा मेैं एक साधारण सा आदमी हॅू मेरी आवश्यकता भी साधारण सी है पर मै जो मागूगां वो आप दे नही पायेगे राजा को यह बात चुभ गयी वोला जो मांगना है मांग लो हीरे-जवाहरात मोती माणिक्य और आधा राज्य तक मै दे सकता हॅू वो वोला महाराज मेरी मांग तो बहुत ही छोटी है क्या आप पूरी कर पायेगे राजा बोला मै वचन दे चुका हॅू बोलो तुम्हारी वो छोटी सी मांग क्या है उस व्यक्ति ने कहा महाराज आप शतरंज तो खेलते होगे राजा ने कहा हाॅ तो महाराज मुझे बस इतना चाहिये कि शतरंज मंे 64 खाने होते है उसके एक खाने में एक चावल का दाना उसके दूसरे खाने में दुगने ...